धुन्धलेशवर महादेव
धुन्ध्लेश्वर महादेव ये नाम संपूरण शर्ष्टि के आदि और अन्तकर्ता भगवान शिव का एक नाम हैं जो की जालोर जिले के भीनमाल तहसील के गजीपुरा गाँव में स्थित हैं.यहाँ पर हर वर्ष की भांति शिवरात्रि को मेला लगता हैं , और गाँव-गाँव से लोग आते हैं . इस स्थल की एक विशेषता हैं की- जो भी लड़की की शादी इस गाँव से कही दूसरी जगह होती हैं उसको साल में एक बार नारियल का भोग लगाने जरुर आना पड़ता हैं. ऐसा लोगो का मानना हैं .
यहाँ पर बड़ा मठ हैं जिसमे वर्तमान में महंत श्री प्रेम भारतीजी महाराज गद्दी पर आसीन हैं, इससे पहले महंत श्री दुर्गा भारतीजी महाराज गद्दी पर आसीन थे जो की वर्तमान महाराज के गुरु थे. यहाँ पर मठ से २ किमी दूर गायो का गौशाला हैं जो की भीनमाल तहसील से ५ किमी दूर हैं . और यह मंदिर भीनमाल से मात्र ८ किमी की दुरी पर हैं. कहा जाता हैं की ये मंदिर सालो पुरानो हैं जिस वक़्त चीनी यात्री हेन्साग भीनमाल होकर गुजरा था उस वक़्त यहाँ पर एक छोटा मंदिर था . यहाँ पर जो भी भक्त बाहर से शिवजी के दर्शन करने के लिए आते हैं. उनके लिए भोजन (प्रसाद) की व्यवस्था मंदिर की तरफ से की जाती हैं. और ये सब व्यवस्था गाँव वालो व दानदाताओ के सहयोग से की जाती हैं. यहाँ पर ग्राम पंचायत भी हैं जिसके अंतर्गत गजीपुरा, कोड़ीता तथा खानदादेवल गाँव आते हैं, गाँव में एक माध्यमिक स्कूल भी हैं.
कहते हैं की जिस समय सार्ष्टि का कही चिन्ह नहीं था उस समय भगवान शिव ही निर्गुण रूप से सर्वव्याप्त सछिदानंद सवरूप एकमात्र परब्रह्म थे .
शिव का अर्थ ही हैं -" कल्याण स्वरुप और कल्याण परदाता".पुराणों में वर्णित है की " शक्ति के बिना शिव शव के समान हो जाते हैं " अतः सार्ष्टि रचना के पर्थम चरण में शर्ष्टि के कार्य आरम्भ करने हेतु महादेव जी ने "शक्ति" को परकट किये.
भगवान शिव सम्पुरण जगत के - " परमपिता " हैं , अतः वे अपनी सभी संतानों से एक तरफ प्यार तो करते ही हैं , परन्तु यह भी सत्य हैं की जो जीव उनसे विशेष अनुराग - और अपनत्व का भाव रखता हैं उसे भोलेनाथ की विशेष कृपा अतिरिक्त रूप से अवश्य प्राप्त होती हैं.
शिवजी के परति अपनत्व के भावो का विकास उपासना की पर्थम सीढ़ी तो हैं ही साथ ही उपासना और आराधना का आधार स्तम्भ भी हैं. " नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय ,
भस्मादंग रागाय महेश्वराय /
नित्याय शुधाय दिगम्बराय ,
तस्मे "न " कार्य नमः शिवाय //
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