गेहूं के दाम काबू करने की कोशिश

बेकाबू महंगाई से परेशान सरकार गेहूं की कीमतों को काबू में रखने पर विशेष ध्यान दे रही है। सरकार अपने इन प्रयासों के तहत खुले बाजार में 50 लाख टन तक गेहूं उतारने पर विचार कर रही है ताकि इसकी सप्लाई बढ़ाई जा सके।

मालूम हो कि कुछ राज्यों में गेहूं की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी का रुख देखा जा रहा है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण सचिव टी.नंद कुमार ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि हमने खुले बाजार में 40 से 50 लाख टन तक गेहूं उतारने के बारे में सैद्धांतिक निर्णय ले लिया है। फिलहाल इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है। अगले 15 दिनों में कैबिनेट बैठक में यह मुद्दा उठाए जाने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को यहां राज्यों के खाद्य सचिवों की समीक्षा बैठक हुई जिसमें विभिन्न प्रदेशों में खाद्यान्न सप्लाई का जायजा लिया गया। इस बैठक के बाद ही नंद कुमार ने संवाददाताओं को इस आशय की नकारी दी। आरंभ में महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्यों के बाजार में गेहूं उतारा जा सकता है क्योंकि वहां इसकी कीमतें बढ़ गई हैं। नंद कुमार ने एक सवाल के जवाब में फिलहाल चावल और गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध हटाए जाने की संभावना से इनकार किया।

इससे पहले गत 16 जुलाई को खाद्य एवं कृषि मंत्री शरद पवार ने कहा था कि खुले बाजार में 60 लाख टन गेहूं बेचने की गुंजाइश है। उन्होंने कहा था कि सरकार इसके लिए अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल कर सकती है। नंद कुमार ने यह भी बताया कि सरकार खुले बाजार में बिक्री के लिए 30 लाख टन चीनी जारी करने पर विचार कर रही है।

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